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May 25, 2022

महाशिवरात्रि पर 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शीश नवा कर मांगी मुरादें

न्यूज पोर्टेल्स/ पौंटा साहिब 

* पौराणिक इतिहास समेटे है प्राचीन पातालेश्वर महादेव मंदिर

* महाशिवरात्रि पर 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शीश नवा कर मांगी मुरादें

* महाऋषि पतंजलि की तपस्या स्थली, भगवान शिव से मिला था वरदान

* आलौकिक शिवलिंग पाताल के गर्भ से प्रकट होने पर श्री पातालेश्वर पड़ा शिव धाम का नाम

देवभूमि हिमाचल में कई प्राचीन व धार्मिक स्थल है। जो अपने आप में कई इतिहास समेटे हुए हैं। इसी श्रृंखला में दशम पातशाह श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज की पवित्र एवं ऐतिहासिक नगरी पांवटा साहिब का अपना अलग ही विशेष धार्मिक महत्व रहा है। गुरु की नगरी में पूरे विश्व से श्रद्धालु वर्ष भर कई धार्मिक स्थलों पर नतमस्तक होते है। पांवटा साहिब से करीब 5 किलोमीटर दूर, महादेव चौक से कुछ दूरी पर ग्राम पातलियो के घने जंगल के किनारे पर स्थित प्राचीन श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर है। जो कि शिवभक्त श्रद्धा आस्था तथा विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ये मंदिर अपने आप मे एक विशेष धार्मिक इतिहास समाए हुए हैं। जैसे शिव की महिमा को लिख पाना बड़ा मुश्किल है, वैसे ही यह भी बता पाना कुछ मुश्किल सा प्रतीत होता है कि शिव धाम का इतिहास कितना पुराना है।

श्री पातालेश्वर मंदिर सीमित अध्यक्ष दाता राम चौहान, संयोजक आरपी तिवारी, सुशील कपूर, विनय गोयल व धर्मवीर राठौर का कहना है कि मंदिर का प्राचीन इतिहास रहा है। कई जन श्रुतियां जूतियां अक्सर सुनने को मिलती है। कुछ शिवभक्त स्थान को पांडवों के समय से जोड़कर देखते हैं। लेकिन सबसे अधिक प्रसिद्ध जन धारणा यही है कि द्वापर युग में योग शास्त्र के महा ऋषि श्री पतंजलि जी महाराज ने इस स्थान पर भगवान शंकर जी की घोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ जी ने महर्षि को वरदान मांगने के लिए कहा। तब महर्षि जी शंभू की जय जयकार करते हुए भक्ति भाव सहित शिव साष्टांग नतमस्तक होकर बोले थे। कि हे दीनबंधु दीनानाथ आप तो अंतर्यामी है। मेरा तो आपकी यहां पर घोर तपस्या करने का मात्र एक ही सर्व हितकारी काम जन जन का भला करने वाला ही प्रयोजन था। कि आप इस स्थान पर ऐसे विशाल दिव्य अलौकिक रूप से सदा सदा के लिए प्रकट हो, जो की दूर-दूर तक कहीं ना हो। ताकि इस स्थान पर शिव भक्ति में डूबे भक्त निरंतर चलते रहे। जन-जन का भला हो। यहां पहुंचकर शीश नावाने वालों का सदा व सबका भला होता रहे।

पूर्व विधायक चौधरी किरनेश जंग, अरविंद गोयल, पवन चौधरी , अजमेर सिंह व अंशुल का कहना हौ की यहां दर्शन करने वाले सब भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होता रहे। भगवान शिव के इतना सुनने पर के पश्चात उन्हें तथास्तु( ऐसे ही हो )कहा और कहने के साथ ही इस स्थान पर एक अति विशाल आलौकिक शिवलिंग पाताल के गर्व से उनके चमत्कार के साथ प्रकट होने लगा। पाताल की गर्भ से प्रकट होने के कारण ही इस धाम का नाम श्री पातालेश्वर महादेव पड़ा। साथ साथ ही यह भी मान्यता भी रही है कि महा ऋषि पतंजलि जी की तपोभूमि होने के कारण इस गांव का नाम पातलियो पड़ा। हर वर्ष यहां पर महाशिवरात्रि का पावन त्यौहार परंपरागत हर्ष, उल्लास व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है। श्रवण मास में शिव भक्तों की भक्ति व शक्ति, पूजा गंगा जल अर्पित करने की संख्या देखते ही बनती है। हर वर्ष श्रावण माह में शिव भक्त द्वारा शिव को गंगा जल अर्पित करते हैं। विशाल भंडारे का आयोजन भी होता है। प्रतिवर्ष श्रावण माह में जन जन के कल्याण के सुख शांति हेतु श्री महामृत्युंजय वा पाठ के पश्चात विशाल भंडारा होता है। अप्रैल माह में श्री बाबा बालक नाथ जी का भव्य विशाल भंडारा प्रत्येक वर्ष होता है। मंदिर समिति शिव भक्तों के सहयोग से मंदिर विकास का कार्य निरंतर प्रगति पर रहता है।

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